अस्वीकरण पर काबू पाना

परमेश्वर हमें स्वीकार करता है।

अधिकांश लोग अपने जीवन में कभी न कभी अस्वीकृत महसूस करते हैं। अपने करीबी लोगों द्वारा दुखित किये जाने पर और टूटे हुए रिश्तों में होने के कारण हम खुद को अनिष्ट और अकेला महसूस करते हैं। अच्छी खबर यह है कि परमेश्वर हमारे दर्द को चंगा करता है, वह हमें स्वीकार करता है और हमें बिना किसी शर्त के प्यार करता है।

अस्वीकृति का दर्द

पढ़िए योहन 4:3-29 और इन प्रष्नों का उत्तर दीजिये।

यह स्त्री भरी दोपहर में अकेले कुएं पर पानी भरने गई क्योंकि, उसके समाज में उसे कई बार शादी करने के वजह से अस्वीकार कर दिया था।

यीशु से मिलने के बाद वह स्त्री आश्चर्यचकित क्यों हो गयी?

जीवन में, ऐसी कौन सी घटनाएं हैं जो लोगों को ठुकराया हुआ महसूस कराती हैं।

ठुकराया हुआ महसूस करने के परिणाम क्या हैं?

दूसरों द्वारा स्वीकार किए जाने के लिए लोग क्या करते हैं?

यीशु ने कैसे दिखाया कि उसने उस स्त्री को स्वीकार किया?

यीशु को अस्वीकार किया गया था

हम कैसे जानते हैं कि यीशु हमारी अस्वीकृति की भावनाओं को समझ सकते हैं?

हम अस्वीकृति पर कैसे काबू पा सकते हैं?

यूहन्ना 4 के इस कहानी में, जब उस स्त्री ने यीशु पर विश्वास करने का फैसला किया, तो उसका जीवन पूरी तरह से बदल गया। आइए इन चरणों को लें और इन छंदों को हमारे जीवन में लागू करें।

 

1. परमेश्वर की शर्तरहित प्रेम को स्वीकार करें –

2. अपनी आवश्यकताओं को परमेश्वर के “जीवन जल” के लिए प्रतिदान करें। –

3. आनन्दित रहें कि आप परमेश्वर के पुत्र बन गए हैं! –

दोस्त से पूछें

  • क्या आपने कभी अस्वीकृत महसूस किया है?
  • आप कैसे जान सकते हैं कि परमेश्वर आपको स्वीकार करता है?

आवेदन

जब हम प्रार्थना करते हैं, तो आइये परमेश्वर से कहें कि वह हमारे दिलों में कार्य करे और हमारी किसी भी अस्वीकृति को प्रकट करे, जिसे हम अपने जीवन में पकड़ रखा है और उससे प्रभावित हैं। याद रखें कि परमेश्वर हमें स्वीकार करता है और हमें शर्तरहित प्रेम करता है और वह हमें अस्वीकृति के दर्द से चंगा कर सकता है।

मॉडल प्रार्थना

प्रभु यीशु, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आप मुझसे प्यार करते हैं और मुझे स्वीकार करते हैं। मैं अपनी अस्वीकार कि भावनाओं को आपके सम्मुख रख देता हूं और आपसे पूर्ण चंगाई मांगता हूँ। इस समय मै उन लोगों को माफ करता हूँ जिन्होंने मुझे चोट पहुंचाई है। धन्यवाद कि आपने मुझे अपना पुत्र बना लिया।

प्रमुख पध