पश्चाताप

परमेश्वर की ओर मुड़ना

पश्चाताप का अर्थ है परमेश्वर की ओर मुड़ना । इसमें एक फ़ैसला और क्रिया शामिल है, स्वयं के रास्ते की पर जाने कि दिशा बदलके परमेश्वर कि ओर मुड़ने का फैसला लेना ।

पश्चाताप का महत्व

किस तरीके से पश्चाताप उद्धार का एक भाग है?

पश्चाताप कैसे सिर्फ शोक महसूस करने से अलग है?

पश्चाताप के कदम

हम खोए हुए पुत्र के बारे में पढ़ेंगे लूकस 15:11-24. इस दृश्टान्त का सारांश बताइये।

पश्चाताप का फल

जक्‍कई के बारे में पढ़ें लूकस 19:5-9

वह बदल गया था यह दिखाने के लिए उसने क्या किया?

हमने पश्चाताप किया है यह दिखाने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

हम पश्चाताप को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा कैसे बना सकते हैं?

पश्चाताप के लिए 3 कदम

1. परमेश्वर के खिलाफ पाप करने के लिए गहरा खेद महसूस करना (2 कुरिन्थियों 7:10)

 

2. अपने पापों को कबूल करना (1 योहन 1:9, याकूब 5:16)

 

3. पाप पर मसीह की जीत और अपने जीवन पर इसके प्रभावों की घोषणा करें और आनंद से रहें (कुलुस्सियों 2:14-15)

दोस्त से पूछें

क्या आप अपने व्यक्तिगत पश्चाताप की कहानी बयान कर सकते हैं?

आवेदन

क्या आप कुछ ऐसा कर सकते हैं जिससे आपके जीवन में बदलाव आये या आपने कुछ ऐसा किया है जिससे आपके जीवन में बदलाव दीखता है? इस विषय में परमेश्वर से मार्गदर्शन मांगे।

पढ़िए भजन संहिता 51 इस भजन संहिता में दाऊद अपने पापों के लिए पश्चाताप करता है।

 

मॉडल प्रार्थना

प्रभु यीशु, मुझे बचाने के लिए धन्यवाद। मैंने पाप से दूर होने का फैसला किया है और आपको भावता हुआ जीवन व्यतीत करने का निर्णय लिया हैं । मैं अपना जीवन आपके लिए समर्पित करता हूं।

प्रमुख पध